आगामी प्रमुख आयोजन

देव संस्कृति पुष्टिकरण लोक आराधन महायज्ञ जयपुर, राजस्थान -२३ से २६ नवंबर, २०१७

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युग सृजेता मेगा यूथ केम्प, नागपुर- २६, २७ और २८ जनवरी २०१८

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अश्वमेध यज्ञ, मंगलगिरी, अमरावती, एपी- से जनवरी २०१८

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सामूहिक उत्कर्ष के लिए सामूहिक साधना

व्यक्ति समूह का एक अविच्छिन्न घटक है। उसकी सत्ता का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब वह समाजनिष्ठ होकर रहे।किसी भी क्षेत्र में सामूहिक विकास के लिये सामूहिक प्रयास आवश्यक होते हैं। विज्ञान हो या उद्योग, शिक्षा हो या चिकित्सा, राजनीति हो या समाजसेवा, सामूहिक गतिविधियों के तालमेल के बिना इनकी स्थिति और प्रगति सम्भव नहीं।

सामूहिक साधना ही हमारी समृद्ध परम्परा का अंग है। समान चित्तवृत्ति तभी होगी, जब समान साधना की जायेगी। एक- सी विचार- तरंगें एक- सी चित्तवृत्ति को जन्म देती हैं। एकाग्रता का यही अर्थ है।अत: सामूहिक साधना की महत्ता समझना और उसे अपनाना आज की युगीन आवश्यकता है। वही प्रगति के आधार जुटा सकती है।

आत्मा समर्पण की साधना से मिलता हैं परमात्मा

आत्मा की परिपूर्णता प्राप्त कर परमात्मा में प्रतिष्ठित होने के दो मार्ग हैं- एक प्रयत्नपूर्वक प्राप्त करना और दूसरा अपने आपको सौंप देना।

तरह- तरह की साधनाएँ, विधि- विधानों का अवलम्बन लेकर प्रयत्नपूर्वक ईश्वर- प्राप्ति की आकांक्षा रखने वाले बहुत मिल सकते हैं, किन्तु सम्पूर्ण भाव से अपने परमदेव के समर्पण हो जाने वाले, जीवन में सर्वत्र ही परमात्मा को प्रतिष्ठित करने वाले, अपनी समस्त बागडोर प्रभु के हाथों सौंप कर उसकी इच्छानुसार संसार के महाभारत में लड़ने वाले अर्जुन विरले ही होते  हैं।

महाक्रान्ति लानी ही है

क्रान्ति का अर्थ सामान्य परिवर्तन क्रम नहीं है। वह तो संसार में चलता ही रहता है। क्रान्ति के लिए वाञ्छित दिशा में, तीव्रगति से परिवर्तन की प्रचण्ड लहर चल पड़ना और उससे व्यापक क्षेत्र प्रभावित होना जरूरी है।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए जो  क्रान्ति उभरी उससे भारत स्वतंत्र हो गया। इसी प्रकार कभी अमेरिका स्वतंत्र हुआ था, रूस की क्रान्ति ने तानाशाही 'ज़ार' का शासन समाप्त करके रूस में समाजवादी तंत्र की स्थापना की थी। इसलिए त्रिविध क्रान्ति, समग्र क्रान्ति, महाक्रान्ति करने की बाध्यता सामने आ गयी है। समग्र क्रान्ति के लिए 'बौद्धिक', 'नैतिक' एवं 'सामाजिक' तीनों क्रान्तियों को परस्पर पूरक बनकर आगे बढ़ाना होगा।

नौ वर्षीय मातृशक्ति श्रद्धांजलि नवसृजन महापुरश्चरण (युग परिवर्तनकारी महाअनुष्ठान)

एक विलक्षण आध्यात्मिक पुरूषार्थ ( नौ वर्षीय मातृशक्ति श्रद्धांजलि नवसृजन महापुरश्चरण) की घोषणा अपने इस विराट गायत्री परिवार के लिए सूक्ष्म जगत से हुई है । 1943 से 1994 तक स्थूल रूप से गायत्री परिवार के संरक्षक के रूप में परम पूज्य गुरुदेव की अभिन्न परम वंदनीया शक्तिस्वरूपा स्नेहसालिता माता भगवती देवी शर्मा जी ने अपने आराध्य पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी के साथ एक अभूतपूर्व पुरूषार्थ संपन्न किया था । 1994 में अपनी आध्यात्मिक एवं स्थूल लीला को समेट कर वे अपने आराध्य की कारण सत्ता में व में विलीन हो गईं । 1926 में जन्मीं हमारी उसी मातृसत्ता की जन्मशताब्दी का प्रसंग समीप आ रहा है । 2026 में सितम्बर माह में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को उनके जन्म को एक शतक पूरा हो जायेगा । इस उपलक्ष्य में हम सभी उनके बालकों उनकी स्मृति में एक आध्यात्मिक महापुरूषार्थ नौ वर्ष तक सतत चलाते रहकर उसकी पूर्णाहुति 2026 में करने का संकल्प किया है ।

यह युग परिवर्तनकारी महाअनुष्ठान 9 जुलाई, गुरुपूर्णिमा 2017 से आरंभ होकर 29 जुलाई, गुरुपूर्णिमा 2026 को समाप्त होगा । इसमें करोड़ो परिजनों की भागीदारी होने जा रही है ।

कैसे इसे करना है; ताकि लक्ष्य पूर्ति तक हम पहुँच सकें? पढ़ें ..

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Gurudev

संरक्षक संस्थापक

एक सन्त, युगपुरुष, दृष्टा, सुधारक आचार्य श्रीराम शर्मा जिन्होने युग निर्माण योजना आन्दोलन का सूत्रपात किया। जिन्होने तपस्या का अनुशासित जीवन जीते हुए आध्यात्मिक श्रेष्ठता प्राप्त कर समस्त मानवता को प्रेरित किया । जिन्होने बदलते समय के अनुसार हमारे दृष्टिकोण को, विचारों को, संवेदनशीलता का विस्तार करने के लिये, जीवन को बदलने के लिये सत्साहित्य का सृजन किया ।

परम पूज्य गुरुदेव एक ऐसे साधक, द्रष्टा, विचारक रहे हैं, जिनको व्यक्ति, परिवार, समाज और देश-विदेश में घट रही अथवा घटने वाली घटनाओं की तह में जाकर उन्हें आर-पार देखने की अलौकिक सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त थी। जो दृश्य-अदृश्य जगत् की विविध परिस्थितियों को निमिष मात्र में भाँपकर उन्हें नियन्त्रित कर लेते थे।

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वास्तव में दुर्लभ और व्यावहारिक लेखन गायत्री मंत्र, साधना और यज्ञ विज्ञान पर .

अद्वितीय आंदोलनविचार क्रांति के पहले ही मुद्दे के साथ "अखण्ड ज्योति " 1939 में पहली पुस्तक में उन्होंने लिखा था "में क्या हूँ ? ", वास्तविक में एक उपनिषद स्तर के काम आत्म के ज्ञान पर ।

पूरा ग्रंथ, हिन्दी, पूरे वैदिक इंजील (वेद, उपनिषद, दर्शन , पुराण और स्मृति की )

प्रमुख पुस्तकालयों द्वारा मान्यता : इन्क्लूडिंग आई .आई.टी मुम्बई , स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेनसिलवेनिया , सिडनी यूनिवर्सिटी ,वेस्टर्न रेलवे हिंदी डिवीज़न -मुम्बई , भंडारकर ओरिएण्टल रिसर्च इंस्टिट्यूट -पुणे

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नए युग की सन्देश वाहिका, एक विचार धारा, प्रचण्ड प्राण प्रवाह,
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