आगामी प्रमुख आयोजन

देव संस्कृति पुष्टिकरण लोक आराधन महायज्ञ जयपुर, राजस्थान -२३ से २६ नवंबर, २०१७

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युग सृजेता मेगा यूथ केम्प, नागपुर- २६, २७ और २८ जनवरी २०१८

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अश्वमेध यज्ञ, मंगलगिरी, अमरावती, एपी- से जनवरी २०१८

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युवा क्रांति रथ - समर्थ राष्ट्र के लिए युवा पीढ़ी तराशने का विशेष अभियान

चार युवा क्रांति रथ सितम्बर २०१७ को रवाना होकर लगभग १०० दिनों की यात्रा में भारत के चारों दिशाओं के अंतिम राज्य के शहरों से प्रारंभ होकर देश के मध्य स्थित नागपुर में २५ जनवरी २०१८ तक पहुँचेंगे। नागपुर में युवा विजन को लेकर एक विराट् युवा सम्मेलन कार्यक्रम २६, २७, २८ जनवरी को संपन्न होने जा रहा है।

युवा परिस्थितियों का मुहताज नहीं, परिस्थितियों का निर्माता है

युवा क्रान्ति वर्ष का अंतिम चरण चल रहा है। चार युवा क्रांति रथ देश के चारों कोनों, चारों दिशाओं से युवाशक्ति के जागरण का अभियान चलाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। युवाओं को जगाने और संस्कृतिनिष्ठ बनाने का अभियान तो तब तक चलता रहेगा, जब तक सुसंस्कृत युवाशक्ति के प्रभाव से अनगढ़ प्रचलन और प्रवृत्तियाँ हथियार डाल देने के लिए मजबूर न हो जायें।

युवाओं के आदर्श स्वामी विवेकानन्द ने युवाओं से यही अपील की है कि वे स्वयं को नश्वर, दुर्बल जड़ पदार्थ की काया न मानें, अपने आप को सामर्थ्यवान ईश्वर का अंश मानें। अपने को काया तक सीमित मानना दुर्बलता को स्वीकार करना है और समर्थ चेतन का अंश अनुभव करना, अपनी अनन्त सामर्थ्य को जगाने का अमोघ सूत्र है।

युगसृजेता सुनें पाञ्चजन्य का उद्घोष

सृजन किसे कहते हैं? यह हर कोई नहीं जानता। जिन्हें योगियों जैसा मनोयोग जुटाने, पराक्रमियों जैसे श्रम- स्वेद बरसाने का अभ्यास है, उन्हीं को सृजन का मूल्य समझने की भी जानकारी है। लोग तो विघटन, पतन और ध्वंस का ही ताना- बाना बुनते रहते हैं और माचिस की भूमिका निभाते, फूलझड़ी चलाते अपनी आतंकवादी अहन्ता का ढिंढोरा पीटते हैं।

महासृजन की इस बेला में युगदेवता के आह्वान का क्या उत्तर दिया जाय? इस संदर्भ में अर्जुन के असमंजस और कृष्ण के उद्बोधन को स्मरण करने से समाधान मिल सकता है। इस मार्ग पर चलने वालों को सदा झंझट सहने और कष्ट उठाने पडे़ हैं।  तर्क और तथ्य प्रस्तुत करते हुए भगवान ने अर्जुन का व्यामोह दूर कर दिया, साथ ही वह असमंजस भी हवा में उड़ गया जो लगता पर्वत के समान भारी था, किन्तु वस्तुत: था तिनके से भी हलका।

नौ वर्षीय मातृशक्ति श्रद्धांजलि नवसृजन महापुरश्चरण (युग परिवर्तनकारी महाअनुष्ठान)

एक विलक्षण आध्यात्मिक पुरूषार्थ ( नौ वर्षीय मातृशक्ति श्रद्धांजलि नवसृजन महापुरश्चरण) की घोषणा अपने इस विराट गायत्री परिवार के लिए सूक्ष्म जगत से हुई है । 1943 से 1994 तक स्थूल रूप से गायत्री परिवार के संरक्षक के रूप में परम पूज्य गुरुदेव की अभिन्न परम वंदनीया शक्तिस्वरूपा स्नेहसालिता माता भगवती देवी शर्मा जी ने अपने आराध्य पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी के साथ एक अभूतपूर्व पुरूषार्थ संपन्न किया था । 1994 में अपनी आध्यात्मिक एवं स्थूल लीला को समेट कर वे अपने आराध्य की कारण सत्ता में व में विलीन हो गईं । 1926 में जन्मीं हमारी उसी मातृसत्ता की जन्मशताब्दी का प्रसंग समीप आ रहा है । 2026 में सितम्बर माह में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को उनके जन्म को एक शतक पूरा हो जायेगा । इस उपलक्ष्य में हम सभी उनके बालकों उनकी स्मृति में एक आध्यात्मिक महापुरूषार्थ नौ वर्ष तक सतत चलाते रहकर उसकी पूर्णाहुति 2026 में करने का संकल्प किया है ।

यह युग परिवर्तनकारी महाअनुष्ठान 9 जुलाई, गुरुपूर्णिमा 2017 से आरंभ होकर 29 जुलाई, गुरुपूर्णिमा 2026 को समाप्त होगा । इसमें करोड़ो परिजनों की भागीदारी होने जा रही है ।

कैसे इसे करना है; ताकि लक्ष्य पूर्ति तक हम पहुँच सकें? पढ़ें ..

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Gurudev

संरक्षक संस्थापक

एक सन्त, युगपुरुष, दृष्टा, सुधारक आचार्य श्रीराम शर्मा जिन्होने युग निर्माण योजना आन्दोलन का सूत्रपात किया। जिन्होने तपस्या का अनुशासित जीवन जीते हुए आध्यात्मिक श्रेष्ठता प्राप्त कर समस्त मानवता को प्रेरित किया । जिन्होने बदलते समय के अनुसार हमारे दृष्टिकोण को, विचारों को, संवेदनशीलता का विस्तार करने के लिये, जीवन को बदलने के लिये सत्साहित्य का सृजन किया ।

परम पूज्य गुरुदेव एक ऐसे साधक, द्रष्टा, विचारक रहे हैं, जिनको व्यक्ति, परिवार, समाज और देश-विदेश में घट रही अथवा घटने वाली घटनाओं की तह में जाकर उन्हें आर-पार देखने की अलौकिक सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त थी। जो दृश्य-अदृश्य जगत् की विविध परिस्थितियों को निमिष मात्र में भाँपकर उन्हें नियन्त्रित कर लेते थे।

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वास्तव में दुर्लभ और व्यावहारिक लेखन गायत्री मंत्र, साधना और यज्ञ विज्ञान पर .

अद्वितीय आंदोलनविचार क्रांति के पहले ही मुद्दे के साथ "अखण्ड ज्योति " 1939 में पहली पुस्तक में उन्होंने लिखा था "में क्या हूँ ? ", वास्तविक में एक उपनिषद स्तर के काम आत्म के ज्ञान पर ।

पूरा ग्रंथ, हिन्दी, पूरे वैदिक इंजील (वेद, उपनिषद, दर्शन , पुराण और स्मृति की )

प्रमुख पुस्तकालयों द्वारा मान्यता : इन्क्लूडिंग आई .आई.टी मुम्बई , स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेनसिलवेनिया , सिडनी यूनिवर्सिटी ,वेस्टर्न रेलवे हिंदी डिवीज़न -मुम्बई , भंडारकर ओरिएण्टल रिसर्च इंस्टिट्यूट -पुणे

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नए युग की सन्देश वाहिका, एक विचार धारा, प्रचण्ड प्राण प्रवाह,
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