साकार ध्यान माता रूप में

हिमालय के उत्तुंग शिखर ।। हिमाच्छादित प्रदेश। ब्रह्म चेतना के धरती पर अवतरित होने का ध्रुव केन्द्र।
  1. -मध्यवर्ती मान सरोवर। अमृत तत्व से भरपूर। शीतल, सुगन्धित, सशक्त विशेषताओं से परिपूर्ण ।। नीलम अगाध जल राशि।
  2. -मान सरोवर में हंस वाहिनी गायत्री माता का प्राकट्य। सौम्य मुद्रा। मधुर मुस्कान। मुख मण्डल पर स्वर्णिम तेजोवलय। उत्कृष्टता की पुण्य प्रतिमा।
  3. -साधक का अविचल रूप से इस दिव्य दर्शन का रसास्वादन ।। अनुग्रह अभिवर्धन की अनुभूति। अन्तःकरण में गोदी में बैठने की आकुलता ।। प्रत्युत्तर में पवित्रता पनपने के अनुपात से असीम स्नेह अनुदान का आश्वासन।
  4. -माता की समीपता एवं अनुकम्पा से उज्ज्वल भविष्य की निश्चिन्तता।
  5. -उपयुक्त पात्रता के उत्पादन के उत्पादन की आतुरता ।। तप साधना के लिए प्राणवान उमंग ।। भावना को जीवन्त बनाने की संकल्पवान धारणा।
  6. -माता की अनुग्रह भरी स्नेह वर्षा अमृत- वर्षा आरम्भ। कण- कण रस विभोर आत्मसत्ता ।। आनन्द में सराबोर।
  7. -स्थूल शरीर में संयम का, सूक्ष्म शरीर में विवेक का, कारण शरीर में श्रद्धा का अदम्य उभार।
तृप्ति तुष्टि और शान्ति की अनुभूति।   



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