समूह साधना वर्ष

समूह साधना पर विशेष बल देने के उद्देश्य को भली प्रकार समझ लेना उचित है। युगऋषि द्वारा प्रेरित साधनाओं का उद्देश्य नवयुग सृजन के ईश्वरीय अभियान को गतिशील बनाना है। इसके लिए व्यक्तित्वों को अधिक परिष्कृत, परिवारों को अधिक सुसंस्कृत और समाज को अधिक व्यवस्थित बनाना जरूरी है। इस उद्देश्य की सिद्धि के लिए व्यक्तिगत साधना के साथ-साथ समूह साधना भी जरूरी है। इसके कई विशेष लाभ हैं-
* व्यक्तिगत साधना में जब साधक का मन ढीला पड़ता है तो उसे सहारा देने की व्यवस्था नहीं होती। समूह साधना में अन्य साधकों द्वारा बनाये गये वातावरण के प्रभाव से ढीले पड़ने वाले साधकों के मन भी सहज ही सँभल जाते हैं, क्रम अधिक टिकाऊ बन जाता है।
* सामूहिक साधना से ‘समूह मन’ बनता है। बेहतर ताल-मेल की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं। सहयोगपूर्वक आगे बढ़ने की प्रवृत्ति बेहतर होने लगती है।
* समूह साधना से उभरे सशक्त स्पन्दनों के प्रभाव से स्थूल-सूक्ष्म वातावरण पर अधिक अनुकूल असर पड़ता है।
* अपनी समीक्षा बेहतर होती है तथा एक-दूसरे के अनुभवों का लाभ सहजता से मिलने लगता है। इससे प्रगति के नये आयाम खुलते हैं।
इसलिए युग परिवर्तन के प्रवाह को तीव्रतर बनाने के लिए समूह साधना पर विशेष बल दिया जा रहा है।


समग्र साहित्य


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अखण्डज्योति पत्रिका १९४० - २०११
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