एक सन्त, युगपुरुष, दृष्टा, सुधारक आचार्य श्रीराम शर्मा जिन्होने युग निर्माण योजना आन्दोलन का सूत्रपात किया। जिन्होने तपस्या का अनुशासित जीवन जीते हुए आध्यात्मिक श्रेष्ठता प्राप्त कर समस्त मानवता को प्रेरित किया
"अपना सुधार
संसार की सबसे बडी सेवा है"
जिन्होने बदलते समय के अनुसार हमारे दृष्टिकोण को, विचारों को, संवेदनशीलता का विस्तार करने के लिये, जीवन को बदलने के लिये सत्साहित्य का सृजन किया

   

परिवर्तन के उत्प्रेरक
ज्ञान विज्ञान
के महत्वपूर्ण बिन्दु
वैज्ञानिक अध्यात्मवाद
ध्यान
शान्तिकुन्ज आश्रम
वर्तमान मार्गदर्शक प्रमुख
महत्वपूर्ण कदम
ऋषि परम्परा का पुनर्जन्म
आत्मानुभूति
आनंदमय जीवन

शांति के नए युग के लिए

गायत्री परिवार जीवन जीने कि कला के, संस्कृति के आदर्श सिद्धांतों के आधार पर परिवार,समाज,राष्ट्र युग निर्माण करने वाले व्यक्तियों का संघ है।

वसुधैवकुटुम्बकम् की मान्यता के आदर्श का अनुकरण करते हुये हमारी प्राचीन ऋषि परम्परा का विस्तार करने वाला समूह है गायत्री परिवार।

एक संत, सुधारक, लेखक, दार्शनिक, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और दूरदर्शी युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा स्थापित यह मिशन युग के परिवर्तन के लिए एक जन आंदोलन के रूप में उभरा है



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अखण्ड ज्योति - हिन्दी नीवं और श...

Shantipath
नारी मूर्तिमान कामधेनु, अन्नपूर्णा, सिद्धि एवं ऋद्धि है।
-Pandit Shriram Sharma Acharya
माता भगवती देवी शर्मा
(१९२६-१९९४)
आचार्यश्री की सहधर्मिणी
नि:स्वार्थ प्रेम और करुणा की अवतार
शांतिकुंज आश्रम
गायत्री तीर्थ। गायत्री परिवार का मुख्य केंद्र । स्वर्ग और देवत्व के अवतरण की प्रयोगशाला।


  • विश्व मे ४००० से अधिक केन्द्र
  • करोडो परिजनो द्वारा अपनाया हुआ मिशन
  • लाखों व्यक्तियों को आध्यामिक दिशाधारा देने वाला मिशन
  • नारी जागरण के आन्दोलन की रूपरेखा बनाने व गतिशील करने वाला मिशन
  • ऋषि परंपरा का पुनर्जागरण





वैज्ञानिक अध्यात्मवाद

विज्ञान और अध्यात्म ज्ञान की दो धारायें हैं जिनका समन्वय आवश्यक हो गया है। विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय हि सच्चे अर्थों मे विकास कहा जा सकता है और इसी को वैज्ञानिक अध्यात्मवाद कहा जा सकता है ..
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भारतीय संस्कृति

आध्यात्मिक जीवन शैली पर आधारित, मानवता के उत्थान के लिये वैज्ञानिक दर्शन और उच्च आदर्शों के आधार पर पल्लवित भारतिय संस्कृति और उसकी विभिन्न धाराओं (शास्त्र, योग ,आयुर्वेद,दर्शन) का अध्ययन करें ..
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प्रज्ञा आभियान पाक्षिक
समाज निर्माण एवम सांस्कृतिक पुनरूत्थान के लिये समर्पित - हिन्दी, गुजराती, मराठी एवम शिक्क्षा परिशिष्ट. पढे एवम डाऊनलोड करे









राष्ट्रीय एकता दिवस पर देसंविवि ने निकाली जनजागरण रैली
राष्ट्रीय एकता दिवस पर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय प...
आईआईटी दिल्ली व देसंविवि मिलकर करेंगे वैज्ञानिक अध्यात्मवाद पर कार्य
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ग्राम जागरण महायज्ञ एवं योग शिविर लाधूवाला- श्रीगंगानगर (राजस्थान),

स्काउट गाइड का राज्य पुरस्कार जाँच शिविर का शुभारंभ
भारत स्काउट गाइड उत्तराखण्ड के प्रादेशिक प्रशिक्षण केन्द्र शांतिकुंज में स्काउट गाइड का पाँच दिवसीय ...
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नवम्बर में आयोजित होगे 3 प्रान्तों के प्रांतीय युवा चेतना शिविर
प्रांतीय युवा चेतना शिविर में राष्ट्र की युवा शक्ति ...
स्वाध्याय संदोह- विचार मंथन सत्र - शांतिकुंज 9 से 13 नवंबर 2014
(पाँच दिवसीय पुस्तक प्रस्तुतीकरण शिविर)

स्वाध्याय...
शरद उत्सव 2014, गायत्री धाम सेंधवा
गायत्री धाम प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी शरद उत्सव का कार्यक्रम होगा जिसमें इस वर्ष 10 राज्यों के भाई-बहन भाग लेते है ...
देसंविवि में चतुर्थ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव कल से 0
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निम्नलिखित विषयो से सम्बन्धित आलेख समाचार पत्र में प्रकाशित किये जा सकते है।

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सही मायने में राष्ट्रीय पर्व दीपावली

लक्ष्मीपूजा का प्रसंग मुख्य है और वह पर्व के ठीक मध्य में आता है। जाति, वर्ग, स्थिति पद, प्रतिष्ठा और ऊँच-नीच के सभी भेद बाधित हो जाते है और उत्साह भरे धीरज के साथ पर्व मनाते हैं। उत्साह लक्ष्मी के आवाहन के लिए और धीरज पुकार सुन लेन लेने की प्रतीक्षा के लिए। दूसरे पर्व उत्सवों की तरह इस दिन आमोद-प्रमोद के साधन इकट्ठे नहीं होते, लेकिन यह कर्मठता और जागरूकता का संदेश जरूर दे जाता है।
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ज्योतिपर्व पर ‘श्री’ तत्व के माहात्म्य को समझें

सौंदर्य एवं समृद्धि की प्रतीक ‘श्री’ अर्थात् लक्ष्मी पूजन अपने राष्ट्र की सर्वाधिक प्राचीन साँस्कृतिक परम्परा है। ज्योतिपर्व दीपावली तो इसी के लिए प्रसिद्ध है। वैदिक काल से लेकर वर्तमान काल तक लक्ष्मी का स्वरूप अत्यन्त व्यापक रहा है। ऋग्वेद की ऋचाओं में ‘श्री’ का वर्णन समृद्धि एवं सौंदर्य के रूपों में अनेकों बार हुआ है।


                                                                                                             कार्तिकी अमावस्या का ज्योति पर्व

दीपावली भारतीय संस्कृति का प्रमुख त्यौहार है। उत्तर भारत के व्यवसायी इस अवसर पर अपना आर्थिक वर्ष आरंभ करते हैं। इस पर्व में कई देवताओं के पूजन का विधान सम्मिलित है। लक्ष्मी और गणेश की आमतौर से पूजा होती है। यों पौराणिक तारतम्य के अनुसार दोनों के बीच कोई संबंध-रिश्ता नहीं है; पर दोनों को एक केन्द्र पर जोड़ देने का दार्शनिक महत्व अवश्य है।

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इस दीपोत्सव पर्व पर हमारी आस्था का बुझा दीप जले

“तमसो मा ज्योतिर्गमय” इस पावन संदेश के साथ दीपावली फिर आ गई। गगनचुँबी अट्टालिकाओं से लेकर छोटी-छोटी झोपड़ियों में कहीं रंग-रोशनी की जगमग, तो कहीं टिमटिमाते दीप, लेकिन इतना तय है कि अमीरी-गरीबी की भावनाओं से ऊपर उठकर रोशनी पूरे भारतवर्ष में होगी।                                Read More
अपने समय का महान आन्दोलन-नारी जागरण :-
युग सन्धि के इन्हीं बारह वर्षों में एक और बड़ा आन्दोलन उभरने जा रहा है, वह है-महिला जागरण। इस हेतु, चिरकाल से छिटपुट प्रयत्न होते रहे हैं। न्यायशीलता सदा से यह प्रतिपादन करती रही है कि 'नर और नारी एक समान' का तथ्य ही सनातन है। गाड़ी के दोनों पहियों को समान महत्त्व मिलना चाहिए। मनुष्य जाति के नर और नारी पक्षों को समान श्रेय-सम्मान, महत्त्व और अधिकार मिलना चाहिए। इस प्रतिपादन के बावजूद बलिष्ठता के अहंकार ने, पुरुष द्वारा नारी को पालतू पशु जैसी मान्यता दिलाई और उसके शोषण में किसी प्रकार की कमी न रखी। ............

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समग्र साहित्य

हिन्दी व अंग्रेजी की पुस्तकें
व्यक्तित्व विकास ,योग,स्वास्थ्य, आध्यात्मिक विकास आदि विषय मे युगदृष्टा, वेदमुर्ति,तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने ३००० से भी अधिक सृजन किया, वेदों का भाष्य किया।
अधिक जानकारी
अखण्डज्योति पत्रिका १९४० - २०११
अखण्डज्योति हिन्दी, अंग्रेजी ,मरठी भाषा में, युगशक्ति गुजराती में उपलब्ध है
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