मंगलगिरी अश्वमेध यज्ञ, आंध्रप्रदेश एवं युग सृजेता युवा शिविर, नागपुर

राष्ट्र की शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ५ से ८ जनवरी २०१८ को मंगलगिरी, अमरावती, एपी में एक शानदार आध्यात्मिक प्रयोग अश्वमेध यज्ञ के लिए सभी आमंत्रित है।

पता:
एनआरआई कॉलेज और अस्पताल, चिन्नककनिककानी मंगलगिरि- ५२२५०३, अमरावती (आंध्र प्रदेश)।

युग सृजेता युवा शिविर, नागपुर - २६, २७ और २८ जनवरी २०१८

वर्ष २०१७ और २०१८ गायत्री परिवार द्वारा युवा क्रांति वर्ष के रूप में मनाया गया जिसकी पूर्णाहुति आगामी 26 से 28 जनवरी 2018 में देश के केंद्र स्थल नागपुर में संपन्न होगी। जिसमें देश के 650 जिलों के चयनित सृजनशील युवा प्रतिनिधि भागीदार बनेंगे। भावी वर्षो के लिए युवाओ की भूमिका तय की जायेगी .

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इस नवरात्र को नौ वर्षीय (मातृशक्ति श्रद्धांजलि ) साधना अभियान का जीवन्त अंग बनायें

आश्विन नवरात्र का पर्व सामने है। दिनांक २१ सितम्बर से २९ सितम्बर तक यह नवरात्र चलेगी।विगत गुरुपूर्णिमा से प्रारंभ किए गये नौ वर्षीय मातृशक्ति श्रद्धाञ्जलि महापुरश्चरण के क्रम में आने वाली यह पहला नवरात्र है। स्नेहसलिला शक्तिस्वरूपा माँ को दी जाने वाली सभी व्यक्तिगत और सामूहिक साधनात्मक श्रद्धाञ्जलियाँ सार्थक, उन्हें संतोष पहुँचाने वाली सिद्ध हों, इसके लिए प्रत्येक नैष्ठिक साधक को प्रखर विवेकशीलता और प्रचण्ड साहसिकतायुक्त पुरुषार्थ करना होगा। 

वन्दनीया माताजी कोई ऐसी साधारण आत्मा नहीं है कि हम उनके निमित्त विशेष जप- तप करके उनके लिए सद्गति के मार्ग खोल दें।इसीके लिए नौ वर्षीय विशिष्ट साधना अभियान चलाया गया है। प्रस्तुत नवरात्र साधना उसी विशिष्ट साधना अभियान का एक जीवन्त चरण बनाना है।

नवरात्रि अनुष्ठान का विधि- विधान

गायत्री परिवार द्वारा बिहार बाढ़ राहत एवं पुनर्वास के कार्य

  • २० लाख रुपये की सामग्री बाँटी गई। 
  • अत्यंत क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत में सहयोग करेंगे। 
  • पूर्णिया जिले में १०८ तथा सीतामढ़ी जिले में २४ नये मकान बनाकर देंगे। 
बिहार के छ: जिलों में चलाये गये राहत कार्यों में १ सितम्बर तक २० लाख रुपये से ज्यादा की आवश्यक राहत सामग्री के वितरण के साथ भोजनालय भी चलाये गये। 
अथाह संकट की घड़ी में बेघर हुए लोगों के पुनर्वास के लिए मकान बनाकर देने के संकल्प भी परिजनों ने लिया है। जनसहयोग के आधार पर इसे यथासंभव बढ़ाया जायेगा। 

नौ वर्षीय मातृशक्ति श्रद्धांजलि नवसृजन महापुरश्चरण (युग परिवर्तनकारी महाअनुष्ठान)

एक विलक्षण आध्यात्मिक पुरूषार्थ ( नौ वर्षीय मातृशक्ति श्रद्धांजलि नवसृजन महापुरश्चरण) की घोषणा अपने इस विराट गायत्री परिवार के लिए सूक्ष्म जगत से हुई है । 1943 से 1994 तक स्थूल रूप से गायत्री परिवार के संरक्षक के रूप में परम पूज्य गुरुदेव की अभिन्न परम वंदनीया शक्तिस्वरूपा स्नेहसालिता माता भगवती देवी शर्मा जी ने अपने आराध्य पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी के साथ एक अभूतपूर्व पुरूषार्थ संपन्न किया था । 1994 में अपनी आध्यात्मिक एवं स्थूल लीला को समेट कर वे अपने आराध्य की कारण सत्ता में व में विलीन हो गईं । 1926 में जन्मीं हमारी उसी मातृसत्ता की जन्मशताब्दी का प्रसंग समीप आ रहा है । 2026 में सितम्बर माह में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को उनके जन्म को एक शतक पूरा हो जायेगा । इस उपलक्ष्य में हम सभी उनके बालकों उनकी स्मृति में एक आध्यात्मिक महापुरूषार्थ नौ वर्ष तक सतत चलाते रहकर उसकी पूर्णाहुति 2026 में करने का संकल्प किया है ।

यह युग परिवर्तनकारी महाअनुष्ठान 9 जुलाई, गुरुपूर्णिमा 2017 से आरंभ होकर 29 जुलाई, गुरुपूर्णिमा 2026 को समाप्त होगा । इसमें करोड़ो परिजनों की भागीदारी होने जा रही है ।

कैसे इसे करना है; ताकि लक्ष्य पूर्ति तक हम पहुँच सकें? पढ़ें ..

युवा क्रांति रथ - अध्यात्मिकता की और युवाओं को प्रेरित

चार युवा क्रांति रथ दिनांक १३ सितम्बर २०१७ को रवाना हुए जो १०० दिनों की यात्रा में भारत के चारों दिशाओं के अंतिम राज्य के शहरों से प्रारंभ होकर देश के मध्य स्थित नागपुर में २५ जनवरी २०१८ तक पहुँचेंगे। जहाँ युवा विजन को लेकर एक विराट् युवा सम्मेलन कार्यक्रम निर्धारित है।


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Gurudev

संरक्षक संस्थापक

एक सन्त, युगपुरुष, दृष्टा, सुधारक आचार्य श्रीराम शर्मा जिन्होने युग निर्माण योजना आन्दोलन का सूत्रपात किया। जिन्होने तपस्या का अनुशासित जीवन जीते हुए आध्यात्मिक श्रेष्ठता प्राप्त कर समस्त मानवता को प्रेरित किया । जिन्होने बदलते समय के अनुसार हमारे दृष्टिकोण को, विचारों को, संवेदनशीलता का विस्तार करने के लिये, जीवन को बदलने के लिये सत्साहित्य का सृजन किया ।

परम पूज्य गुरुदेव एक ऐसे साधक, द्रष्टा, विचारक रहे हैं, जिनको व्यक्ति, परिवार, समाज और देश-विदेश में घट रही अथवा घटने वाली घटनाओं की तह में जाकर उन्हें आर-पार देखने की अलौकिक सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त थी। जो दृश्य-अदृश्य जगत् की विविध परिस्थितियों को निमिष मात्र में भाँपकर उन्हें नियन्त्रित कर लेते थे।

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वास्तव में दुर्लभ और व्यावहारिक लेखन गायत्री मंत्र, साधना और यज्ञ विज्ञान पर .

अद्वितीय आंदोलनविचार क्रांति के पहले ही मुद्दे के साथ "अखण्ड ज्योति " 1939 में पहली पुस्तक में उन्होंने लिखा था "में क्या हूँ ? ", वास्तविक में एक उपनिषद स्तर के काम आत्म के ज्ञान पर ।

पूरा ग्रंथ, हिन्दी, पूरे वैदिक इंजील (वेद, उपनिषद, दर्शन , पुराण और स्मृति की )

प्रमुख पुस्तकालयों द्वारा मान्यता : इन्क्लूडिंग आई .आई.टी मुम्बई , स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेनसिलवेनिया , सिडनी यूनिवर्सिटी ,वेस्टर्न रेलवे हिंदी डिवीज़न -मुम्बई , भंडारकर ओरिएण्टल रिसर्च इंस्टिट्यूट -पुणे

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