जल संसाधन की सफाई और संरक्षण कार्यक्रम

अखिल विश्व गायत्री भागीरथी जलाभिषेक अभियान
श्रीराम सरोवर

वर्षा जल संरक्षण संवर्धन का परम्परागत सर्वश्रेष्ठ उपाय

1- गौरवशाली अतीत& आज&कल शुद्ध् जल की उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है। सच ही कहा है] जल ही जीवन है। परन्तु प्रदूषित पर्यावरण और जल संरचनाओं के प्रति हमारी उदासीनता जल को जीवन से दूर कर रही है। बहुत पुरानी बात नहीं] वरन् अंग्रेजों के आगमन तक हमारा देश पवित्र सरोवरों का देश रहा है। तालाबों का निर्माण हमारे देश पवित्र सरोवरों का देश रहा है। तालाबों का निर्माण हमारे धार्मिक स्वभाव का महत्वपूर्ण घटक था। राजाओं का प्रजा हित, श्रीमन्तों का पुण्य अर्जन] धर्मशीलों का धर्मशीलों का धर्म साधन] अनेक जातियों का सामाजिक कर्म तालाब बाँधना रहा है। वर्षा जल की बूॅँद& बूॅँद सहेजना और धरती का पेट भरना यह कार्य हमारे पूर्वज पूरी श्रद्वा से करते रहे। इसी कारण लाखों की संख्या में सदानीरा स्वच्छ ताल हमारी संस्कृति की पहचान बने हैं।

2- वर्तमान संकट& नगरों का अनियंत्रित और अदूरदर्शी विकास सर सरोवर पोखर] तालाबों को निगल गया। जहाॅँ तालाब थे वहाॅँ आज गगनचुम्बी इमारतें और काॅलोनियाॅँ दिखाई देती हैं। मेघ बरसते हैं और जीवनदाता बूँदें बहकर समुद्र में चली जाती हैं। भूजल स्तर का निरंतर गिरना धरती नीलग्रह है तथा इसके क्षेत्रफल का 2@ 3 भाग समुद्र है। पानी कितना मूल्यवान् है इसी से अन्दाज& अनुमान लगाया जा सकता है कि कुल उपलब्ध जल में से 90% समुद्र में खारा पानी है 17% ध्रुव प्रदेशों एवं ग्लेशियरों में हिम रूप में जमा है। शेश भूजल 3% में से मात्र 1% पानी ही पीने योग्य है, वह भी प्रदूषण की चपेट में है। सूखती प्रदूषित नदियाँ] सड़ते और सूखते ताल नीचे गिरता भूमिगत जलस्तर आने वाले समय में जल संकट के भयावह संकेत दे रहा है। किसी ने सच ही कहा है कि यदि तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो वह जल के लिए होगा।


समाधान की राह& अखिल विश्व गायत्री परिवार का भागीरथी जलाभिषेक अभियान जिसके अंतर्गत देश के जल स्रोतों  जल संरचनाओं की स्वच्छता और संवर्धन के प्रयास किये जा रहे हैं। निर्मल गंगा जन अभियान  नर्मदांचल शुद्धि अभियान बनास अंचल स्वच्छता  बागमति स्वच्छता अभियान सहित 10 नदियों पर स्वच्छता एवं संरक्षण के अभियान चलाये जा रहे हैं। अन्य जल स्रोतों को युवा मण्डलों द्वारा गोद लेकर उनकी स्वच्छता हेतु प्रयास किये जा रहे हैं। ऐसा ही एक विनम्र प्रयास है& श्रीराम सरोवर।

श्रीराम सरोवर& इस योजना के अंतर्गत 1008 सरोवरों को विकसित करने का कार्य हाथ मैं लिया गया है। सदानीरा  निर्मल मनोहर  हरित एवं मुक्त् जल स्रोत युक्त् पंच लक्षणों वाले तालाब विकसित किये जा रहे हैं।
1- सदानीरा सरोवर& तालाब पर्याप्त गहरा हो  जिससे वर्श भर जल की उपलब्धता बनी रहे।
2- निर्मल सरोवर&स्वच्छ  निर्मल जल हो एवं सरोवर के जल ग्रहण क्षेत्र में खुले शौच पर प्रतिबंध रहे।
3- मनोहर सरोवर& सरोवर के तट को सुन्दर घाटों और प्राकृतिक संसाधनों से मनोहर बनाया जाये।
4- हरित सरोवर& सरोवर की पाल पर पर्यावरण औषघि एवं धार्मिक महत्त्व के पौधों का रोपण हो। नक्षत्र ग्रह राशि वाटिकाओं की स्थापना, पंचवटी, त्रिवेणी  हरिशंकरी वृक्ष समूहों का रोपण हो।
5- मुक्त् एवं स्वच्छ जल स्रोत वाला सरोवर& सरोवर के जल संग्रहण क्षेत्र से सरोवर तक प्राकृतिक स्रोतों] नालों आदि के प्रवाह में रुकावट न आने दी जाये। गंदे सीवेज या गाँव की नालियों का गंदा पानी सरोवर में न जाने दिया जाये।
सच पूछें तो आज भी खरे हैं तालाब। पोखरों और हमारी संस्कृति का सरस संबन्ध इन्हीं के निर्माण एवं विकास से निभेगा।
रहिमन पानी राखिये  बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे  मोती मानुष चून।।
भीषण जल&संकट के दौर में आओ सहेजें बूॅँद&बूॅँद वर्षा जल और जीवित करें सूखती सरिताओं को सड़ते& सिकुड़ते तालों को ताकि हरी रहे धरती की चूनर और शेष् रहे धरती पर जीवन।
आवाहन है जाग्रत्& सेवाभावी एवं संवेदनशील नागरिकों का अपने&अपने क्षेत्र में श्रीराम सरोवर के निर्माण हेतु।






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